सवाल पे उठे सवाल

सवाल पे ही सवाल उठे हैं।
तू कौन है? सवाल उठे है।
        क्यों चुप रहना ,कुबूल नहीं?
        क्या देश से तुमको प्यार नही?
       
देश से जो हो वफ़ा दिखाना..
एक ही रंग अपना ले अब
राशन, पानी, नहीं मिले गर
रंज न कर भूल जा सब
        
        हम हैं ..बस... हम ही हैं
        हम करेंगे वही खुदाई
        जंजीरों में जकड़े जाना
        है तुम्हारी वहीँ भलाई

नही गँवारा हमे ये ज़ुल्मत
आवाज ये खामोश नही होंगे
सवाल उठेंगे हर और से
हर और से शोर होंगे

दिल