मेरे लिए इस संसार की सबसे खूबसूरत चीज है दोस्ती . लेकिन आज भी लड़की को इस नायाब तोहफे से महरूम रखा जाता है ....क्योंकि वह एक लड़की है....समाज के इस कोतेेपन को दर्शाती है यह कविता ..
एक दोस्त खो दिया ...
हाथ में हाथ डाले
हम स्कूल जाते थे ...
इमली, चॉकलेट पेपर मिंट
मिल बाँटकर खाते थे
कीचड़, पत्थर कच्चा रस्ता
पैर फिसले तो गिर जाए बस्ता
कभी तू मुझे तो मैं तुझे
गिरने पर संभालते थे...
ना तुम boy थे ना मैं थी girl
हम सिर्फ दोस्त थे हर पल
फिर क्यों कहा इक दिन सब ने ?
तू लड़की है... अब तो संभल...?
झट से तेरा हाथ छूट गया
कुछ दूरी पर तू सिमट गया..
दोस्ती, यारी, हँसना ..रुठना..
लड़का लड़की में बंट गया...
मैंने एक दोस्त खो दिया.....
अरे घर पर भी तो यही हुआ
पहले नानी, चाची और फिर बुआ
सयानी हो गई ...सलीका सिखना
अब तू पापा से न लिपटना..
और मैने एक दोस्त खो दिया .
पापा के साथ भाई भी छूटा
मस्ती- मजाक सब बंद? दिल पूरा टूटा
इस सयानेपन के आने से
मेरा बचपन ही मुझसे रूठा
मैंने एक औऱ दोस्त खो दिया...
दुनिया के दस्तूर से मैं बड़ी हो गई
खुद को संभलकर खड़ी हो गई...
फिर कॉलेज में प्यारा दोस्त मिला
उसके साथ में बचपन को फिर जिया
प्यारी सी दोस्ती थी और दोस्ती में प्यार था
पर उसपर भी सवाल उठे ..जमाने का दस्तूर था
कौन है वो? तुझसे करेगा शादी?
लड़कियों के लिए अच्छी है क्या?
ऐसी छूट और इतनी आजादी ?
और मैने दोस्त खो दिया...
फिर शादी की, एक पति मिला
मैंने समझा चलो दोस्त मिला
वो मेरा.. मैं उसकी..हक्क से लड़ूंगी
कान खिचूँगी उसके...हँसी मजाक भी करूँगी
पर मेरा सोचना होना न था
पति को दोस्त बनना न था..
दोस्ती नाम का रिश्ता अब पराया सा है
शादी के बाद दोस्ती? एक गुनाह सा है.
पिता, भाई, पति और माता
क्यों चाहिए तुझे और कोई नाता?
मैने भी यह कानून मान लिया
लड़की को 'दोस्त' नहीं होता जान लिया
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