दिल

  

अपने हिस्से के पल में ठहर जाता है 

                 चुपके से यह दिल मेरा  कुछ कह जाता है


दिल के इक कोने में पनपी है ख्वाईश 

प्यार पाने और देने की है फरमाइश 

मुठ्ठी में चुराकर वह पल, उड़ जाता है...

               चुपके से यह दिल मेरा  कुछ कह जाता है 


फूलों के संग ओस भी खिली है आज

मेरे गीत पे मेरी धुन और मेरा साज

जीने की आस हर पल दे जाता है

           चुपके से यह दिल मेरा  कुछ कह जाता है 


अरे, मुद्दतों बाद हुई खिलने की चाह

आँखे खोल खुद से ही मिलने की चाह

 ख्वाब पुराने अब पल पल जी जाता है

                चुपके से यह दिल मेरा कुछ कह जाता है

                 चुपके से यह दिल मेरा कुछ कह जाता है


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