मुश्किलों की ना फिक्र मुझे
ईनसे टक्कर हर पल है
उनके फितरत से वाबस्ता
जीनकी आहट हर पल है ।
कभी काँटे बन राह के
या झांझर, पायल ही बनकर
मेरी उम्मीद और हसरत को,
वह रोक लगाये हर पल है।
सदियों से यह दीवारें
सिसकियां मेरी सुनकर
मूंद आँख और मुँह भी सीकर
टकराती मुझसे हर पल है ।
हर ठोकर से हम उभरेंगे
तू हर मुमकिन कोशिश कर
नहीं रुकेंगे.. नहीं झुकेंगे
बुलंद हौसलें हर पल है।
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