जब....

 जब कोई बात हो...

    और न कोई साथ हो...
   समय के साथ का ...
   साथ तू जोड़ लेना ...
           और फिर खड़े होना ....

     जब सवाल खड़े हों...
'जवाबों' से बड़े हों ....
जब "तू" और "तू" ही ...
आपस में लड़े हों ...
स्वयं की शक्ति को 
धैर्य से जोड़ लेना.. 
         और फिर खड़े होना ...

    जब प्रवाह की दिशा से 
    तेरी दिशा हो अलग
    न मन में हो शंका ..
   न हो तेरे पैर डग-मग 
       "तुझ से ही शुरू ....
         नई दिशा का है होना...."
                बन अटल .बन निडर 
          और फिर खड़े होना

पंक्ति .

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दिल