जब अपने चले जाते है....
उनको बहुत दुःख होगा
पीड़ा लेकर उस रूह को
सफ़र लंबा करना होगा
वह जा नहीं पाएंगे
जीवन के इस चक्र में
फिर जकड़े जायेंगे
इक दिन सबको जाना है
और जानेवाले सबको लेकिन
लौटके फिर आना है
का भेद बुद्ध ने जाना था
भूत- भविष्य को भुलाकर
उसने आज को पहचाना था
की सुख दुःख से परे रहूँ
दोनों को बस अपना लूँ मैं
दोनों के साथ चले चलूँ....
जी भर कर मैं रो भी लूँ
यादों का छोर लिए हाथ में
मैं भोर की और चलूँ
मैं भोर की और चलूँ
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